पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षाबलों के बीच खूनी संघर्ष में 150 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों को दौड़-दौड़ाकर गोली मारी, जिसमें अब तक कई लोगों की मौत हुई है और 100 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस घटना के बाद से PoK में तनाव बढ़ गया है। इलाके में हो रहे प्रदर्शन की अगुवाई करने वाली जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का आरोप है कि सेना ने रावलकोट में एक जनाजे में शामिल लोगों पर फायरिंग की है।
क्यों दी गई प्रदर्शन की चेतावनी
बताया जा रहा है कि शाहजेब के जनाजे में शामिल लोग पाकिस्तानी सेना और शहबाज सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, तभी सुरक्षाबलों ने गोलीबारी शुरू कर दी। कमेटी का आरोप है कि सुरक्षाबलों ने मारे गए प्रदर्शनकारियों के शवों को अपने साथ ले गए। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने आज बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी थी उससे पहले सेना ने 27 लोगों को गोली मार दी। खबर ये भी है की एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज़ मीर को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए गए हैं। क्योंकि शौकत नवाज़ ने शहबाज सरकार के खिलाफ आज बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इस घटना के बाद लोगों के बीच भारी गुस्सा है।
मस्जिदों से किया जा रहा है ऐलान
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के समर्थक रावलकोट की मस्जिदों से लगातार ऐलान कर रहे हैं कि ‘कश्मीर’ पर विदेशी ताकतों ने हमला किया है। इस ऐलान में लोगों से बड़ी संख्या में बाहर निकलकर मुकाबला करने की अपील की जा रही है। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक रावलकोट में सोमवार को हुए बवाल में तीन पुलिसकर्मियों को पंजाब रेंजर्स ने कथित तौर पर गोली मार दी, इनमें एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल है। पूरे इलाके में इंटरनेट ब्लैकआउट किया जा चुका है, ताकि लोग एक जगह पर इकट्ठे न हों।
पाकिस्तान की नफरती सजिश का खुलासा
पाकिस्तान ने दो गैर जरूरी फ्रंट खोले हैं, जिसमें से एक गिलगित-बाल्टिस्तान में और दूसरा आजाद कश्मीर में। दोनों जगहों पर जो भी सरकार की आलोचना करता है, उसे भारतीय एजेंट बता दिया जाता है। सैन्य शासन ने अपने ही खिलाफ दो मोर्चे बना लिए हैं। हमीद मीर पाकिस्तान की मिलिट्री सरकार (सेना के शासन) की आलोचना कर रहे हैं कि उन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (आजाद कश्मीर) में अपनी नीतियों के खिलाफ विरोध को दबाने के लिए लोगों को "भारतीय एजेंट" का लेबल लगा दिया है, जो पाकिस्तान के हित में नहीं है।
क्यों भड़की हिंसा?
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जुलाई के महीने में चुनाव होने वाले हैं और इससे पहले यहां मांग की जा रही है कि इस क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। बता दें कि ये इलाका लंबे वक्त से अपने लिए मूलभूत सुविधाओं और राजनैतिक प्रतिनधित्व की जंग लड़ रहा है।
क्या हैं लोगों की मांगें?
- प्रमुख मांगों में उन 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करना शामिल है, जो जम्मू-कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए विधानसभा में निर्धारित हैं।
- इन 12 सीटों के कारण गैर-स्थानीय लोग पीओके की राजनीति को प्रभावित करते हैं।
- पाकिस्तान की बड़ी राजनीतिक पार्टियां इस क्षेत्र की सरकारों को नियंत्रित करने में सफल हो जाती हैं।
- इसके अलावा, सस्ती बिजली, आर्थिक सुधारों, मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं की भी मांग की जा रही है, जो लंबे समय से इस इलाके का मुद्दा रहे हैं।
- पाकिस्तान की सरकार ने इस खास इलाके को नजरअंदाज कर रखा है।
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